Saturday, 24 March 2018

मानव संसाधन विकास मंत्रालय शिक्षण संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों को स्वायत करने का निर्णय वापस ले





मानव संसाधन विकास  मंत्रालय का शिक्षण संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों (केंद्रीय, राज्य, निजी) को स्वायत करने का निर्णय छात्र विरोधी हैं | आननफानन में लिए गए इस निर्णय से विशेष तौर पर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के हितों पर कुठाराघात होगा | शिक्षा प्राप्ति के रास्ते में पहले से ही कई तरह की बाधाओं से घिरी लड़कियों, विशेष तौर पर गाँव/कस्बो की लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा और ज्यादा दुर्लभ होगी | ऑनर्स की डिग्री हासिल करने के इच्छुक छात्रों और उनके अभिभावकों पर आर्थिक बोझ असहनीय होगा |
            निजी संसथान, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और राज्य विश्वविद्यालयों को नए पाठ्यक्रम लागू करने, नए विभाग, स्कूल और कैंपस खोलने के लिए विश्वविद्यालयों अनुदान आयोग (यूजीसी) की परमिशन की दरकार नहीं होगी, पर साथ ही यूजीसी की ओर से कोई अनुदान नहीं मिलेगा | इसका मतलब साफ़ है कि उन्हें छात्रों से लाखों में फ़िस वसूलना होगा|
            भारत जैसे देश में जहाँ विषमता अलग-अलग रूपों में पहले से विद्यमान है ऐसे में शिक्षा के क्षेत्र में स्वायतता का फंदा शिक्षा प्राप्ति के अरमानों का गला घोंटेगा | हमें यह नहीं भुलाना चाहिए कि किसी भी राष्ट्र का नैतिक-स्वालंबी रूप उसकी शिक्षा से तय होता है | उच्च शिक्षण संस्थानों के स्वायतता के नाम पर लाखों करोडो वंचितों को शिक्षा से दूर करने का यह WTO मॉडल है , जिसे बड़ी बेशर्मी से मौजूदा सरकार विश्वविद्यालयों पर थोप दिया हैं |
            यह अत्यंत दुर्भाग्य पूर्ण है कि अपने पद की गरिमा और जिम्मेदारी का निर्वाह न करके मानव संसाधन मंत्री छात्रों के भविष्य के साथ खेल रहे हैं | देश के राष्ट्रपति, जो विश्वविद्यालयों के विजिटर भी होते हैं, और प्रधानमन्त्री ने भी छात्र और उच्च शिक्षा विरोधी इस नीति की तरफ से आँखे बंद की हुई हैं | ऐसा क्यों है ? दरअसल, यह नवउदारवादी नीतियों के तहत देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को नष्ट करके यहाँ विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए शिक्षा का बाजार उपलब्ध कराना है छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ का ऐसा उदाहरण दुनिया में अन्यंत्र नहीं मिलता |
            सोशलिस्ट युवजन सभा (एसवाईएस) मांग करती हैं कि मानव संसाधन मंत्रालय विश्वविद्यालयों को स्वायत करने का निर्णय अविलम्ब वापस ले | साथ ही सोशलिस्ट युवजन सभा दिल्ली व देश के सभी छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से अपील करती है कि वे विश्वविद्यालयों को स्वायत करने के निर्णय के खिलाफ हर संभव पुरजोर विरोध करें और सरकार पर इसे अविलम्ब रद्द करने का दबाव डालें |
 नीरज कुमार
अध्यक्ष
सोशलिस्ट युवजन सभा

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प्रतिक्रांति के हमसफर

(यह टिप्पणी 2014 की है. हस्तक्षेप पर प्रकाशित हुई थी. 5 साल बाद देश और दिल्ली में अब फिर चुनाव होंगे. टिप्पणी फिर से इसलिए दी जा रही है ...