Friday, 11 December 2015

शिक्षा के बजारिकरण और निजिकरण के खिलाफ़



 

भारत सरकार ने 15 से 18 दिसम्बर 2015 को नैरोबी(केन्या) में होने वाले विश्व व्यापार संगठन (WTO) के दसवें मंत्री-स्तरीय सम्मेलन में WTO के सभी 161 देशों की शिक्षा का धंधा करने वाली कम्पनियों को हमारे देश में कौलेज, विश्वविद्धालय एवं अन्य तकनिकी व पेशेवर(प्रोफेशनल) संस्थाओं का कारोबार खडा करने की खुली छूट देने की तैयारी कर ली है | सोशलिस्ट युवजन सभा मानती है की ऐसा होते ही जनता का शिक्षा का अधिकार, जिसे सुनिश्चित करना सरकार की लोकतान्त्रिक जिम्मेदारी है, पूरी तरह खत्म हो जायेगा | WTO-GATS ('जनरल एग्रीमेंट ओंन ट्रेड इन सर्विसेज़' यानी 'सेवा क्षेत्र में व्यापार के लिए आम समझौता') की शर्तो के तहत बेलगाम निजिकरण एवं बजारिकरण से शिक्षा न केवल गरिबों और पहले से जाति,धर्म, लिंग व विकलांगता के कारण वंचित तबकों के हाथ से निकल जाएगी, बल्कि जो इसका खर्चा उठा सकते हैं उन्हें भी केवल ना मात्र की शिक्षा ही मिलेगी | ऐसा इसलिए होगा क्योंकि बेतहाशा बाजारिकरण के चलते शिक्षा अपने मूल उद्देश्य से भटक जाएगी और साथ ही पाठ्यक्रम, विषयवस्तु व शिक्षणपद्धति में भी भारी गिरावट होगी| शिक्षा इतनी महँगी हो जाएगी कि मध्यम वर्ग के लिए भी इसका बोझ ढोना मुश्किल हो जाएगा | WTO के मातहत शिक्षा में लोकतांत्रिक व सामाजिक न्याय के एजेंडे को दरकिनार कर दिया जाएगा और इसके अन्तर्गत अब तक किए गए प्रावधानो को जैसे कि आरक्षण, होस्टल, स्कलरशिप, फ़ीस में छूट या मुफ़्त शिक्षा आदि- के लिए भी कोई जगह नहीं बचेगी|
सोशलिस्ट युवजन सभा मानती है की WTO-GATS कानूनी रूप से शिक्षा को बिकाऊ माल और स्टुडेंट्स को खरिदार में बदल देता है | आज 9 दिसम्बर 2015 को सोशलिस्ट युवजन सभा ने अखिल भारत प्रतिरोधक मोर्चा के साथ जन्तर मन्तर दिल्ली में उच्च शिक्षा को WTO के हवाले किए जाने के खिलाफ़ आयोजित कार्यक्रम का हिस्सा रहा | कार्यक्रम में सोशलिस्ट पार्टी के वरिषठ सदस्य और अखिल भारत प्रतिरोधक मोर्चा, स्वागत समिति के अध्यक्ष जस्टिस रजिन्दर सच्चर  ने कहा कि सोशलिस्ट पार्टी शिक्षा के बजारिकरण और निजिकरण के खिलाफ़ लगातार संघर्ष कर रही हैं और इसके खिलाफ़ हो रहे सभी लडाईयों का समर्थन करती है | शिक्षा को WTO के हाथ सौपना देश के छात्रों के भविषय के साथ खिलावाड़ है| 
सोशलिस्ट युवजन सभा के डा. हिरनय हिम्कर ने भी संबोधित किया

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